चंबल का एक डाकू शक्ति सिंह।अपने गिरोह के अत्याचारी सरदार से उसकी पत्नी ममता को बचाता है और उसकी इच्छा के अनुसार उसे उसकी मौसी के घर छोड़ कर वापस आ जाता है। लौट कर वो कैलाश पांडे के गिरोह में शामिल हो जाता है। थोड़े समय बाद कैलाश पांडे का हृदय परिवर्तन हो जाता है और वह अपने गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ आत्म समर्पण कर देता है। शक्ति सिंह आत्मसमर्पण नहीं करता और बंबई (अब मुंबई ) भाग जाता है। वहाँ उसकी मुलाक़ात ममता से होती है फिर क्या होता है ? जानने के लिये सुनिए भगोड़ा