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ये सच है I यही सच है II

Rajesh Sinha
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जिंदगी में हमें क्या चाहिए ? थोड़ा सा सुकून, थोड़ा सा प्यार, थोड़ा सा सहयोग और थोड़ा सा सामंजस्य। लेकिन ये सब एक जगह, एक घर में, एक शहर में कहाँ मिलता है? इसके लिए लड़ाइयाँ लड़नी पड़ती हैं, जद्दोजहद करना पड़ता है। आज का परिवेश बदल गया है। संघर्षशील व्यक्ति कुंठित हो जाता है और उसके मन को बहुत ठेस लगती है। वहीं, अहंकारी और निष्काम व्यक्ति सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ता जाता है और धन दौलत से परिपूर्ण हो जाता है। कवि जिंदगी को जितने सूरतों में देखता है, उसे अपने तौर पर पेश करता है। जिंदगी के हुस्न की कहानरी हो या उसकी बदसूरती का बयान, सब को अपने दामन में समेट कर चलती है। इस का अंदाजा यहाँ प्रस्तुत संकलन ये सच है, यही सच है से लगाया जा सकता है।

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